शराब मे ग़म को मिलाने लगे !!
ये शराब भी बेवफा निकली यारो !!!
नशे मे तो वो और भी याद आने लगे !!!!
बोतल छुपा दो कफ़न में मेरे शमशान में पिया करूंगा,
जब खुदा मांगेगा हिसाब तो पैग बना के दिया करूंगा.
मैं तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती
मैं जवाब बनता अगर तू सवाल होती
सब जानते है मैं नशा नही करता,
मगर पी भी लेता मैं अगर तू शराब होती |
शराबी को शराब कि ज़रुरत थी मगर शराब
कि बोतल शराब से खाली थी
शराबी को सिर्फ़ एक जाम कि
जरुरत थी मगर ग्लास तेरे जाम से खाली थी .
नज़र साकी पर हैं,और लब पैमाने पर
दिल हमारा है आज फिर, किसी के निशाने पर
वो खाली प्याला लिए लेटें हैं,
कबार मैं अपनी कहते हैं शराब मिलाएगी,
जन्नत के आने पर..
पी है शराब हर गली की दुकान से,
दोस्ती सी हो गयी है शराब के जाम से,
गुज़रे है हम कुछ ऐसे मुकाम से,
की आँखें भर आती है मोहब्बत के नाम से.
shayari on sharab
हमारे बिन अधूरे तुम रहोगे
कभी था कोई मेरा,तुम खुद कहोगे
न होगें हम तो ये आलम भी न होगा
मिलेगें बहुत से पर कोई हम-सा न होगा.
साकी से कह दो की उस मे अब वो बात ना रही
जब से निगाहो से पी है बोतल की याद ना रही
बेहोश कौन करता है ये तो वक़्त ही बताएगा
पर जाम मे अब उनकी निगाहो सी कायनात ना रही.
जाम कडवा ही सही,हंस के निगल जाता हूँ
शाम ढलती ही तेरी गलियों मैं निकल जाता हूँ
मेरी आदत ही जवानी में पड़ी ऐसी थी
ठोकरें खाने की मगर फिर भी मैं
ठोकरें खा खा कर संभाल जाता हूँ
प्यार में ठोकर लगे तो दारू पी कर भुला देना,
दिल से आह निकले तो होठों में दबा लेना,
ए दोस्त… अगर मेरी याद आए मुझे
अपने पास बोतल खोलकर बुला लेना
हमारी काबिलियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे ग़ालिब ,
हम तो कब्रिस्तान से भी गुज़रते है तो मुर्दे उठ कर कहते है
भाई एक-एक बियर हो जाए
तबाह करती है शराब, गलत इस पर इल्ज़ाम है,
मददगार का बदनाम होना तो, कुदरत का निज़ाम है!
खुंखारों को मय, तह-ए-दिल से सलाम है,
बिना इसके तो खुदा जाने, क्या हुमारा अंजाम है!
लोग पीते है शराब महखाने जा जा कर
हमने तो आँखों से पी है,
जो दो पल में उतर जाये वो शराब ही क्या ,
हमने तो पी है अपने महबूब की आँखो से,
जो उमर भर ना उतार पाएगी
हर इंनसान में खुदा बेठा है,
जब में पीता हूँ तो खुदा भी पीता है
कौन कहता है शराब बुरी चीज़ है,
जब खुदा भी उसे पीता है
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लोगों ने कहा की मैं शराबी हूँ,
मैने कहा उन्हो ने आँखों से पिलाइ है.
लोगों ने कहा की मैं आशिक़ हूँ,
मैने कहा आशिक़ी उन्हो ने सिखाई है.
इस क़दर गम मिले है दुनिया से
हम ना पीतेतो मर गए होते
अगर सहारा ना जाम का होता
जाने कब के बिखेर गये होते.
sharab par shayari
हर बात का कोई जवाब नही होता…
हर इश्क़ का नाम खराब नही होता..
या तो जम लेते है नशे मे पीने वाला
मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…
बदनामी का डर होता तो,
हम जहा मे आते ही क्यो,
होंश मे आने का शौक होता तो,
हम पी कर डगमगाते ही क्यो.
हमारे बिन अधूरे तुम रहोगे
कभी था कोई मेरा,तुम खुद कहोगे
न होगें हम तो ये आलम भी न होगा
मिलेगें बहुत से पर कोई हम-सा न होगा.
एक जहाँ माँगा था जिसमे बहुत सारा प्यार मिले,
मगर दे दिया महखाना जहाँ बहुत सारी शराब थी
एक कंधा माँगा थाजिसका मुझे सहारा मिले,
मगर दे दी ज़िंदगी जहाँ दुनिया भर की तन्हाई थी…
sharab par shayari
उसकी बेवफ़ाई ने हमे मजबूर किया पीने को शराब,
पीने की आदत पड़ चुकी अब और तबीयत भी रहने लगी खराब,
अब तो नशे मे मोहल्ले मे रोज़ किसी ना किसी से होता है झगड़ा,
और तो और अब तो गली के बच्चे भी कहने वो आ गया झगड़ने वाला बेवड़ा
हो चुकी मुलाकात अभी सलाम बाकी है
तुम्हारे नाम की दो घूँट शराब बाकी है .
तुमको मुबारक हो खुशियूं का शम्याना
मेरे नसीब मे अभी दो गाज़ ज़मीन बाकी है.
आपके वास्ते गुनाह ही सही,
हम पिए तो सबब बनती है,
बहोत गमो को संजोने के बाद,
एक कतरा यहा शराब बनती है.
दूरिया आसानी से मिटती है शराब,
मजबूरियों को नशे मे नाचती है शराब….
आँसुओ को मिला दे तू अपने हर एक जाम मे,
फिर देख कैसे यादों को और करीब लाती है शराब.
चल पीला दे मुझे अपने हाथों से एक प्याला हो जाएगा
मेरी ज़िंदगी में उजाला गाएँगे गीत हम अपनी दोस्ती के
लिए रात भर नशा कम ना हो और ना ख़तम मैखाना
मैखाने मे आऊंगा मगर पिऊंगा नही, साकी;
ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात नही रखती।
maikhana shayari in hindi
शाम थी वो कातिल,जो उसकी यादें ले आई ,
थाइ हम तन्हा, हमे महखाने ले आए, साकी ने टोवा और भी जुलाम ढाया हम पर,
के चालक गया पैमाना, ऐसी आँखियों से पिलाई …
हर बात का कोई जवाब नही होता…
हर इश्क़ का नाम खराब नही होताआ..
या तो जूम लेते है नशे मे पीने वेल मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…
नशे में भी तेरा नाम लब पर आता है,
चलते हुए मेरे पावं लड़खड़ता है,
तूफान सा दिल में उठता है मेरे,
हसीन चेहरे पर भी दाग नज़र आता है
कुछ नशा आपकी बात का है,
कुछ नशा धीमी बरसात का है,
हमे आप यू ही शराबी मत कहिए,
ये दिल पर असर आपसे पहली मुलाक़ात का है.
गुम इस कदर मिला की गबरा के पी गये,
थोड़ी ख़ुसी सी मिली की मिला के पी गये,
यू तो ना थे हम पीने के आदि,
शराब को तन्हा देखा तो तरस खा के पी गये.
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